Gulzar Shayari : Gulzar’s poetry is renowned for its simplicity, depth, and beautiful choice of words. Themes of love, solitude, relationships, life, and unfulfilled emotions are expressed with exquisite grace in his verses. If you appreciate poetry that conveys the deepest sentiments in just a few words, this collection of Gulzar’s poetry is perfect for you.
This is the new collection of Gulzar Shayari.
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गुलज़ार शायरी

तेरे-करम-तो-हैं इतने कि याद हैं अब तक,
तेरे सितम हैं कुछ इतने कि हमको याद नहीं।
🥀✍️💯
आप के बाद हर घड़ी हम ने
आप के साथ ही गुज़ारी है
✍️❤️
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर,
आदत इस की भी आदमी सी है
🍂💕
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार,
दिखे ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा।
🍂💯
“तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,
दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे,
ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,
उसको पढते रहे और जलाते रहे”।
✍️💯
शायर बनना बहुत आसान है,
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए।
✍️💯🍂
तू कितनी भी खुबसुरत क्यूँ ना हो ए ज़िंदगी,
खुश मिजाज़ दोस्तों के बगैर तु अच्छी नहीं लगती।
✍️🍂
जिंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,
काफिला साथ और सफर तन्हा।
💕🥀
कोई पूछ रहा हे मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत,
मुझे याद आ रहा हैं तेरे हल्के से मुस्कुराना।
🍂❤️
मेरे-तेरे इश्क़ की छाँव मे,
“जल-जलकर” काला ना पड़ जाऊ,
कहीं तू मुझे हुस्न की धुप का एक टुकड़ा दे।
🥀🍂
चाँद रातों के ख्वाब,
उम्र भर की नींद मांगते हैं।
❤️🍂
बहोत अंदर तक जला देती है,
वो शिकायते जो बया नहीं होती।
🥀🍂
अपने होठों से चुन रहा हूँ,
तुम्हारी सांसो की आयतो को,
की जिसम के इस हसीन काबे पे
रूह सजदे बिछा रही है।
💯✍️
वो मोहब्बत भी तुम्हारी थी नफरत भी तुम्हारी थी,
हम अपनी वफ़ा का इंसाफ किससे माँगते,
वो शहर भी तुम्हारा था वो अदालत भी तुम्हारी थी।
✍️🫰
ज़िन्दगी उसकी जिस की मौत पे,
ज़माना अफ़सोस करे ग़ालिब,
यूँ तो हर शक्श आता हैं,
इस दुनिया में मरने कि लिए।
✍️💕
2 Line Gulzar Shayari
इक उर्म हुई मैं तो हंसी भूल चुका हूँ,
तुम अब भी मेरे दिल को दुखाना नही भूले।
💯
आज हर ख़ामोशी को मिटा देने का मन है,
जो भी छिपा रखा है मन में लुटा देने का मन है।
🥀❤️
“कभी कभी तो आवाज़ देकर,
मुझको जगाया ख़्वाबो ने”।
🥀✍️
गुल से लिपटी हुई तितली को गिराकर देखो,
आँधियों तुमने दरख्तों को गिराया होगा।
🫰😊
तुमसे मिली जो जिंदगी,
हमने अभी बोई नहीं,
तेरे सिवा कोई न था,
तेरे सिवा कोई नहीं।
✍️🍂
“ये तुमने ठीक कहा है,
तुम्हें मिला ना करूमगर मुझे ये बता
दो कि क्यों उदास हो तुम”?
✍️💯
तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं,
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ, भेजी हैं।
🍂🫰
एक बार तो यूँ होगा कि थोड़ा सा सुकून होगा,
ना दिल में कसक होगी और ना सर पे जूनून होगा।
✍️🥀
तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था,
मगर नींद नहीं।
🫰😊💯
शाम से आँख में नमी सी है,
आज फिर आप की कमी सी है।
✍️❤️
दौलत नहीं शोहरत नहीं,
न वाह चाहिए,“कैसे हो?”
बस दो लफ़्जों की परवाह चाहिए।
😊🫰
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था,
आज की दोस्ती हमारी है।
🥀❤️
आइना देख कर तसल्ली हुई,
हम को इस घर में जानता है कोई।
🫰😊
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा।
🥀✍️
आप के बाद हर घड़ी हम ने,
आप के साथ ही गुज़ारी है।
😊🍂
मैंने दबी आवाज़ में पूछा?
मुहब्बत करने लगी हो?
नज़रें झुका कर वो बोली, बहुत।
✍️🫰
मैं दिया हूँ!
मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं,
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं।
❤️💕
उसने कागज की कई
कश्तिया पानी उतारी और,
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे।
✍️🍂
बेशूमार मोहब्बत होगी उस बारिश की बूँद
को इस ज़मीन से,
यूँ ही नहीं कोई मोहब्बत मे
इतना गिर जाता है।
😊🥀
तुम्हे जो याद करता हुँ,
मै दुनिया भूल जाता हूँ ।
💕😊
तेरी चाहत में अक्सर,
सभँलना भूल जाता हूँ ।
❤️🍂
अगर कसमें सब होती,
तो सबसे पहले खुदा मरता।
🍂😊
हाथ छुटे तो भी रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक़्त की शाख से रिश्ते नहीं तोड़ा करते।
🫰💯

मुझसे तुम बस मोहब्बत कर लिया करो,
नखरे करने में वैसे भी तुम्हारा कोई जवाब नहीं।
🍂🥀😊